Sunday, October 13, 2013

 दोषी था क्या वाकई रावण ?
------------------------------
आया फिर है आज दशहरा . मिला राम को जीत का सेहरा;
कहते है  जीती अच्छाई  ,  हुई  पराजित आज  बुराई;
दोषी था क्या इतना रावण ?, क्या था राम से वैर का कारण ?
अपमानित हुई उसकी बहना ,मुश्किल था इस दंश को सहना;
उसने राम को था ललकारा ,दाँव लगाया  साम्राज्य सारा ;
काश ! विभीषण वहां न होता . रावण का यह हश्र न होता
यद्यपि सीता हरण हुआ ,कभी न सीता को उसने छुआ  ;
रही सुरक्षित सीता वन में ,त्रिजटा जैसी सेविका संग में ;
क्या बहनों का गर्व न रावण ? दिखे बुराई का क्यों कारण?
सीता ने दी अग्नि परीक्षा ; ग्रहण राम से करे क्या शिक्षा;
राजा  राम थे   बिलकुल बच्चे ? या थे पूरे कान  के कच्चे;
सीता लिए मिलन की आस , मिला उसे पति से वनवास;
शासक करता है मनमानी , रामराज्य कल्पना  बेमानी?
 लिखता है विजेता  इतिहास , उड़ता पराजित का  परिहास .

लोकतंत्र में अब हम रहते , जिसे विवेक का शासन कहते ;
न्याय, व्यवस्था का आधार , हो न किसी पर अत्याचार .
रावण  था क्या वाकई मुलजिम ? करे विचार  सभी प्रबुद्ध जन;
इसीलिए मरता न रावण , प्रतिवर्ष पूछे अन्याय का कारण ;
काश देश में ऐसा होवे , सच्चाई का    मान न खोवे ,
शासक बने जन  उत्तरदायी , बने परिवेश अति सुखदायी ,
आये प्रतिवर्ष विजयादशमी , पर न बनायें इसको रस्मी .

Friday, October 11, 2013

स्वतन्त्र भारत में सम्पूर्ण क्रांति की अवधारणा के पुरोधा ......लोकनायक जय प्रकाश नारायण


आज जय प्रकाश बाबू का जन्मदिवस है जिन्हें लोकनायक के नाम से जाना जाता है, जय प्रकाश जी गांधीजी के अहिंसात्मक आन्दोलन की पीढ़ी के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी थे. स्वतान्रता के बाद भी वे राजनीतिक लाभों से दूर समाज सेवा के कार्यो से जुड़े रहे , विनोबा जी के साथ सर्वोदय आन्दोलन को भी उन्होंने दिशा दी.
स्वतंत्रता के बाद भारतीय राजनीति जिस पतन  व अवसरवादिता की ओर अग्रसर हुई ,उससे वे बहुत व्यथित रहे और लोक तंत्र  में सुधार के लिये  वे सदैव सचेष्ट रहे . उन्होंने निर्दलीय प्रजातंत्र ,प्रतिनिधि को वापस बुलाने का अधिकार और राजनीति पर लोकनीति की स्थापना जैसे विचार प्रतिपादित किये. उनके विचारों की आलोचना हुई , उन्हें अव्यवहारिक एवं स्वप्नदर्शी कहा गया . जिसका उत्तर देते हुए उन्होंने कहा ,' एक क्रन्तिकारी को स्वप्नदर्शी होना ही चाहिए .यदि ऐसा नही होगा तो उसे नए समाज का चित्र कैसे प्राप्त होगा."
1970 से 1980 के बीच उन्होंने उन्होंने भारतीय राजनीति में प्रभावी भूमिका निभायी.गुजरात के छात्र आन्दोलन को उन्होंने समर्थन दिया.बिहार में भी परिवर्तन की आँधी वहाली, उन्होंने राजनीति में बढ़ती निरंकुशता की प्रवृत्ति के विरुद्ध और व्यवस्था परिवर्तन के लिए अहिंसक आन्दोलन किया .वे युवाओ के मार्गदर्शक और प्रेरणाश्रोत बन गए .देश में जगह जगह निम्नांकित नारा गूंजने लगा -
सम्पूर्ण क्रांति अब नारा है.भारत वर्ष हमारा है ,
सिंहासन खाली  करो , कि जनता  आती है .

उनकी सम्पूर्ण क्रांति  की अवधारणा  न केवल राजनीति बल्कि समाज के प्रत्येक क्षेत्र में सकारात्मक,लोकतान्त्रिक  एवं प्रगतिशील परिवर्तन पर आधारित थी .उनके आवाहन पर  अनेक छात्रो ने एक वर्ष के लिए पढ़ाई छोड़ दी . वामपंथी दलों को छोड़ कर सभी गैर कांग्रेसी दल उनके आन्दोलन में शामिल हो गए, उनके आन्दोलन से तत्कालीन इंदिरा गाँधी कि कांगेसी सर्कार हिल गयी . जब जय प्रकाश जी ने पुलिश व सेना से भी इस आन्दोलन में शामिल होने की अपील की तो सर्कार बौखला गयी , इसी बीच इलाहबाद हाईकोर्ट  ने इंदिरा गाँधी का चुनाव अवैध घोषित कर दिया जिससे उनके इस्तीफे की मांग जोर पकड़ने लगी. चद्र शेखर के नेतृत्व में काग्रेश में युवा ततुर्क के नाम जाना वाला धड़ा भी जय प्रकाश जी के साथ जुड़ गया .
इसका परिणाम यह हुआ कि सरकार  ने आतंरिक इमरजेंसी घोषित कर दी ,जेपी आन्दोलन से जुड़े सभ नेता तथा वामपंथी डालो सहित सभी गैर कांगेसी दलो के नेता जेल में डाल  दिए गए. इमरजेंसी में देश की जनता ने निराकुश्ता का स्वाद चखा. सजय गाँधी के नेतृत्व में युवा कांग्रेस ने देश में मनमानी शुरू कर दी .साकार की परिवार नियोजन के लिए जबरन नसबंदी की  नीति ने  देश की जनता में भय व दहशत पैदा कर दी. इस समय जय प्रकाश जी के जिस सन्देश से जनता को भरोसा मिला वह था --- डरो मत , मै अभी जिन्दा हूँ ...

सरकार ने भी महसूस किया कि निरंकुशता अधिक  दिनों तक नहीं चल सकती , अन्तरराष्ट्री दबाव के कारन भी सर्कार ने नए चुनाव कराये, इमार्जेब्सी समाप्त कर दी गयी , आंदोलनकारियो की विजय हुई . जय प्रकाश  जी देश के संरक्षक के रूप में जनता के द्वारा स्वीकारे गए , उनके प्रयास से अनेक दल   व राजनीतिक समूह जनता दल  के रूप में संगठित हुए और   चुनाव में १९७७ के आम चुनन में स्वतन्त्र भारत के इतिहास में पहली बार केंद्र में गैर कांग्रेसी सरकार  बनी . इंदिरा जी राय बरेली से चुनाव हार गयी.
 नयी सरकार भी जे पी के बताये रास्ते  पर नहीं चली .गाँधी कि तरह जे पी को भी उपेक्षित कर दिया गया .
क्षीण  स्वास्थ्य और बढ़ती उम्र के कारन जेपी भी टूट गए थे.और कुछ समय बाद उनका निधन हो गया.
 अपने अंतरविरोधो के चलते यह सर्कार तीन वर्ष में ही गिर गयी और इंदिरा जी पुनः सत्ता  में आ गयी '
स्वतन्त्र भारत के इतिहास में व्यवस्था परिवर्तन के संघर्ष में जय प्रकाश के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता ........
 

Tuesday, January 1, 2013

स्वागत  नव वर्ष 

"नव वर्ष है स्वागत तेरा , स्वागत हमारी परम्परा ;
गत वर्ष से आहत है मन . माहौल है दहशत भरा .
मुजरिम बढ़ें  प्रतिदिन यहाँ ,हैवानियत परवान पर ;
खतरे में बेटियों की आबरू ,लानत है अब इंसान पर .
बौनी व्यवस्था  दिख रही ,सत्ता का स्वर खामोश है ;
दिखता  न कोई निदान है ,कलरव नहीं आक्रोश है .
नव वर्ष से आशा यही , हैवानियत का नाश हो ;
हर आदमी के दिल में अब ,इंसानियत का वास हो "

Tuesday, March 6, 2012

यह है चुनाव परिणाम

केंद्र राज्य में जिसने लूटा , उन पर वोटर का गुस्सा फूटा ;
जिनके थे सब वैभव ठाठ , उनको सीखा दिया है पाठ;
राजनीति का कैसा ढंग ? दम्भी का हुआ रंग में भंग ;
यू पी में है सपा की बारी , अन्य दलों की दिखे लाचारी
आयी यह कैसी है होली? बंद हुई माया कि बोली ;
अन्य राज्यों में भी है खटका , सभी दलों को मिला है झटका ;
राजनीति का अजब है पन्ना , समझे इसको भी टीम अन्ना;
जनता को कब ,कौन है भाये? इसको कोई समझ न पाये;
खा न सके अब जनता धोखा , कहता चुनाव परिणाम अनोखा ।

Friday, February 10, 2012

बेवकूफ नहीं है जनता

विधान सभा निर्वाचनों का दौर चरम पर है । कोई भी दल जनता को लुभाने में पीछे नहीं रहना चाहता । वादों को परोसने की होड़ लगी है । किसी दल के अध्यक्ष को सभी उम्मीदवार गधे लगते है । कोई याद दिलाता है कि बटाला मामले में उनके अध्यक्ष रो पड़े थे फिर संशोधन आता है कि रोये नहीं केवल मायूस हुए थे । सभी दल मुस्लिम वोटों को आरक्षण के झुनझुने से रिझाने में लगे हैं । भ्रष्टाचार की पोल खोलने का दावा करने वाला दल ओ ० बी ० सी ० वोटों के लालच में घोषित भ्रष्टाचारी नेताओं को शामिल कर रहा है । टिकट की कसौटी जिताऊ उम्मीदवार है न कि स्वच्छ छवि ।
चुनाव आयोग का डंडा प्रभावी है । नोटों के बण्डल पकडे जा रहे हैं । जुलूसों , विज्ञापनों व शोर पर प्रतिबन्ध से जनता राहत की साँस ले रही है । अन्ना फैक्टर का इतना असर तो हुआ ही है कि जनता के सामने राजनीतिक दलों की हकीकत सामने आ गयी है। मतदान में बढ़ता वोटिंग का प्रतिशत जन चेतना क़ी निशानी है ।
समस्या यही है कि जनता के सामने विकल्प सीमित हैं ।
आने वाले चुनाव के नतीजे बेहद चौकाने वाले होगें । राजनीतिक दलों को समझना होगा कि जनता वेवकूफ नहीं है .उसे केवल वादों से नहीं भरमाया जा सकता ।

Monday, September 19, 2011

राजनीति क़ी चाल अनोखी

गाँधी के गुजरात में मोदी का उपवास ,
चीफ मिनिस्टर ने कहा यह गंभीर प्रयास ,.
कांग्रेस को लग रहा यह गाँधी का उपहास ,
मोदी ने तो कर दिया सदभाव का सत्यानाश .

अनशन क्या था ? हो रहा ,ज्यों कोई भारी जलसा ,.
बीजेपी के नेताओं का जमघट ,जम कर बरसा ,
अडवाणी से लेकर हेमा मालिनी ने की शिरकत ,
शिव सेना और राज ठाकरे ने भी बढाई हिम्मत .

बाघेला संग कांग्रेस ने किया जबाबी अनशन .,
साराभाई मल्लिका ने भी किया विरोध प्रदर्शन
राशिद अल्वी ,जे ड़ी यू ने कोसा इसको जम कर ,
हुए करोडो खर्च , तो माने कैसे इसे जनहितकर?

समझाया मोदी ने उनको यह विकास का फंडा,
कभी -कभी सद्भाव बढ़ाता है शासन का डंडा ,
यह माडल गुजरात, जिसका लोहा माने अमरीका
इसके आगे कांगेस का शासन लगता फीका .

अगर हो गये इस विकास -अनशन में करोडो खर्च .
क्यों लगती है कांग्रेस के नेताओं को मिर्च ?
यह जनता का धन है और अनशन है जनसेवक का ,
दिखा रहा हर चैनल ,इसमें भाग ले रहा हर तबका .

सूफी मत के इक इमाम ने पहनाई मोदी को चादर ..
टोपी पहना सके नहीं वे ,क्योकि झुका नहीं था मोदी का सर .
यह भी था सद्भाव विलक्षण , मोदी के विकास माडल का ,
बीजेपी क़ी राजनीति का , मोदी क़ी जनप्रियता ,बल का .

आने वाला नया इलेक्शन , पी एम् क़ी है दावेदारी .
मोदी बीजेपी में नायक , उन पर गड़ती नजरें सारी
संघ ,राज और.शिव सेना को , मोदी लग रहे सबसे प्यारे .
अडवाणी ,सुषमा व ,जैतली , मोदी से लगते सब हारे.

राजनीति क़ी चाल अनोखी ,कब बन जाये कोई नायक ?
लोकतंत्र में जनता का मन .किसको ठहरा दे खलनायक?
आने वाले है चुनाव अब ,देखे किसको कौन रिझाता ?
भ्रष्टाचार विरोधी अन्ना का मत अब कितना रंग लाता ?

Wednesday, August 17, 2011

हुंकार

अन्ना की आंधी है आयी. उमड़ रहा है जन- सैलाब ,
सत्ताधारी पशोपेश में ,जनता को वे क्या दें जबाब ?
जाग चुकी है जनता अब तो ,सत्याग्रह उसका अधिकार ,
सत्ता का मद चूर-चूर हो ,भरता जन-जन यह हुंकार .